Mai Chala Jaun Toh – Nihal Srivastava

Mai Chala Jaun Toh – Nihal Srivastava

मैं चला जाऊँ तो

 

मैं चला जाऊँ तो तुम्हारी दास्तान का क्या होगा
इतने दिन से खामोश तेरी जुबान का क्या होगा

 

कभी तूने किये नही वादे ना लिखे कोई खत
जो दिया नही तुमने उस सामान का क्या होगा

 

ना जाने कितने ख्वाब सुलग रहे थे मेरे अंदर
अब दिल के धुएं-धुंए से मेरे अरमान का क्या होगा

 

जब न होंगे सितारे महताब के उजाले छत पर
टूट कर आये जमी पर आसमान का क्या होगा

 

इतने खयाल निकले है मेरे मन से हवा बनकर
ऐसे झोको में तेरे रूह के मकान का क्या होगा

 

कुछ सीख लो नए नुस्खे ज़िन्दगी बिताने के तुम
तुम्हारे नए महबूब नए मेहमान का क्या होगा

 

जो इल्म नही दिए तूने मुझे मोहब्बत के कभी
खुदा जाने जन्नत में मेरे इम्तिहान का क्या होगा

 

Mai chala Jaun Toh

 

Mai chala Jaun Toh Tumhari Dastaan Ka Kya Hoga
Itne Din Se Khamosh Teri Zubaan Ka Kya Hoga

 

Kabhi Tune Kiya Nahi Waade Na Likhe Koi Khat
Jo Diya Nahi Tumne Us Samaan Ka Kya Hoga

 

Na Jaane Kitne Khwab Sulag Rahe The Mere Andar
Ab Dil Ke Dhue-Dhue Se Mere Armaan Ka Kya Hoga

 

Itne Khayal Nikle Hai Mere Man Se Hawa Bankar
Aise Jhokon Me Tere Rooh Ke Makaan Ka Kya Hoga

 

Kuch Seekh Lo Naye Nuskhe Zindgi Bitaane Ko Tum
Tumhare Naye Mehboob Naye Mehmaan Ka Kya Hoga

 

Jo ilm Nahi Diye Tune Mujhe Mohabbat Ke Kabhi
Khuda Jaane Jannat Me Mere Imtihaan Ka Kya Hoga

 


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