Mai Aur Meri Tanhaai – Nihal Srivastava

Mai Aur Meri Tanhaai – Nihal Srivastava

 

मुझे नींद नही आ रही थी सोचा चाँद को देखकर ही मन बहला लूँ। ना जाने क्यों उस चाँद में एक और चाँद नज़र आता है “मैंने खुद से बात की”
तो तुम्हे किसी से इश्क़ हो गया है। तुम जाकर अपनी मोहब्बत का इज़हार क्यों नही करते।
करना तो चाहता हूँ मगर उसकी इजाजत नही है। मैंने जाने-अनजाने में उससे एक वादा कर लिया है। उसने मुझसे कहा है कि-अगर आप मुझसे सच में प्यार करते है तो मुझसे बात करके मुझे तकलीफ मत दीजिए इसलिए मैंने कभी उससे अपने दिल की बात नही कही। उससे रिश्ता होने के वावजूद मैं उसके सामने एक अजनबी बनकर रहा।
“इश्क़ में किसी की इजाजत नही गुस्ताखी करनी पड़ती है”,मेरे दोस्त, वरना तुम देखते रह जाओगे और ऐसे ही कबतक उदास रहोगे।

मैं इश्क़ में उदास नही हूं। ज़िन्दगी में और भी कुछ गम है जिनका नाम मुझे नहीं पता पर उन्हें महसूस कर सकता हूँ। पर ना जाने क्यों-मेरे हर उदासी में सिमरन का ज़िक्र जरूर हो उठता है।
“इन आंसुओ को मैंने अपनी आँखों में ज़ब्त कर रखा है। कभी-कभी उसकी यादे इसे रिहा करने की कोशिश करती रहती है। कभी-कभी ये पन्ने भीग जाने की जिद किया करते है।”

मेरी जो सच्चाई थी मैंने उसे खुलकर बता दी अब उसे मुझपर यकीन ना आये तो मैं क्या करूँ। उसे मुझसे प्यार करने की कोई वजह ही नही मिली। उसे लगता है कि-मै प्यार करने के काबिल ही नहीं हूं। उसका हमसफर बनने के लायक ही नही हूं। पता नही उसे कैसा हमसफ़र चाहिए? मैं तो उससे बहुत कुछ कहना चाहता था मगर उसने मुझे मौका ही नही दिया। मैं उसे बताना चाहता था कि-जब कभी भी तुम्हारी याद आती है तो मैं गुम सा हो जाता हूं और बहुत सारे ख्वाब देखने लगता हूं जो शायद कभी पूरे नही होने वाले। अगर तुम भी मुझसे प्यार करती तो कितना अच्छा होता। हम दोनों एक साथ पूरी दुनिया की सुन्दरता को देखते और फिर कही दूर जाकर, किसी वादी में एक छोटा सा घर बनाकर बेफिक्र ज़िन्दगी बिताते। जहाँ ना दिन होते ना शाम ढलती और जी भर के एक-दूसरे को देखा करते।

तुम्हे पता है सिमरन,मुझे ये भीड़ और लोगो का शोर नही पसंद है। मै बस तुम्हारे पास रहकर,तुम्हारे साथ,तुम्हारी बाहों में अंतिम साँस लेना चाहता हूँ। अगर तुम्हारे बदले में मुझे जन्नत,पैसा या कुछ भी महँगी चीज़ मिले तो भी मै नही लूंगा। मुझे तो बस तुम चाहिए।
मेरी हर कल्पना में तुम रहती हो। मै हमेशा तुम्हारे सहारे जन्नत की सैर कर लेता हूँ। मैं देखता हूँ कि-मैं तुम्हारी गोद में सर रखकर सोया हूँ और तुम मेरे बालों को धीरे-धीरे सहला रही हो। मैं तुम्हारी आँखों में आंखें डालकर तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ पर ये देखकर तुम मुस्कुरा रही हो। तुम्हारे बालो से बेला की भीनी-भीनी खुशबू आ रही है जो मौसम में एक नशा घोल रही है। मैं तुम्हारे बालो में गजरे का फूल लगाना चाहता हूँ। तुम्हे सितारों सा चमकने वाला एक दुपट्टा देना चाहता हूं जो मैं आसमान से खींचकर लाया हूं। तुम्हारे हाथो के कंगन को देखकर ऐसा लगता है जैसे- तुमने अपने हाथो में चाँद को पहन रखा है। तुम्हारे होठो की लाली डूबते हुए सूरज की तरह लगती है। मैंने समंदर से मोती ढूढ़-ढूढ़कर एक हार बनाया है। मेरी तमन्ना है कि- मैं उसे अपने हाथों से तुम्हारे गले में पहनाऊँ।
तुम्हारे गुलाबी और नाजुक पैरो के लिए एक पायल और हर रास्तो पर फूल बिछाना चाहता हूँ। तुम्हारे पैर की घुंघरू की छनछन अपने आंगन में सुनना चाहता हूं।

मैं जानता हूं कि- ये सब मेरा ख्याल है लेकिन कुछ पल के लिए ये मुझे बहला देते है। मैं वाकई तुम्हे खुश देखना चाहता हूँ। तुम्हारे सपनो को अपना मानकर पूरा करना चाहता हूँ। अगर तुम मेरी ज़िन्दगी में आ जाओ तो मैं मुकम्मल हो जाऊंगा और मैं ये महसूस करूँगा की मैंने दुनिया का सबसे अनमोल हीरा पा लिया है।
दिल चाहता है कि- मैं तुम्हे अपने गले से लगा लूँ, जी भर के तुम्हे देख लूँ। अपने हाथों से तुम्हारी जुल्फे सवारूँ और तुमसे बात करते-करते कल्पनाओं में खो जाऊँ।

जब मैं तुम्हे खो –  देने का एहसास करता हूं तो लगता है कि- मैंने दुनिया छोड़ दी है और जब तुम्हारी तस्वीर देखता हूं तो लगता है कि- तुम मेरे पास बैठी हो। उस वक्त मुझे किसी से डर नही लगता और पूरी दुनिया जीतने का जिगर आ जाता है।
यूँ ही बैठे-बैठे झूम जाना जैसे किसी ने तेरी यादो की शराब पिला रखी हो। इतना नशा मुझे कभी नही हुआ इतनी मिठास तेरे ख्याल में कभी नही आयी। जैसे तुम वाकई हक़ीक़त हो। तुमसे कभी मुलाकात तो नही हुई है लेकिन फिर भी बार-बार तुम्हारा ही चेहरा घूम कर मेरी आँखों के सामने आ जाता है जैसे कि-मैं तुमसे कई बार मिल चुका हूं। हम दोनों का कई जन्मों से रिश्ता है।

………बस…..बस….अब मुझसे और नही सोचा जाता। कितना दर्द होता है। किसी के याद में जलना, एक झटके में सारे ख्वाबो का टूट जाना।
ये सारी बाते लिखते हुए ना जाने क्यों चुभन सी हो रही है क्या उससे सच में मोहब्बत हो गयी है? या फिर मैं ये सब औपचारिकता वश लिख रहा हूँ। ये दिल उसे पाना भी चाहता है और उससे दूर भी रहना चाहता है। मैं अब भी भ्रमित है अपनी मोहब्बत से। मेरे प्यार का अब तक कोई प्रमाण नही मिला जिससे मैं ये साबित कर सकूँ कि-मेरी मोहब्बत सच्ची है। मैं इस लंबे इंतज़ार का सफर कैसे तय करुँ जिसकी कोई सीमा नही है। बस एक उम्मीद है उसके वापस आने का।

मैं जानता हूँ ये इश्क़ बस जिस्मो का खेल है मगर तेरे प्यार ने पहली नज़र में ही मेरे दिल का चैन और करार छीन लिया है।
मैं किससे शिकायत करुँ कि-मैं रोज़ उसका पीछा किया करता था मगर उसने कभी मुड़कर मुझे नही देखा।
उसे क्या पता की कोई उसे चाहता है। उसके लिए दिल-ओ-जान से परेशान है।
मैं जानता हूँ ये मेरी शायरी,ग़ज़ल और किताब ये सब तो बस हवस पूरा करने का एक नाटक था, एक रास्ता था लेकिन वक्त के साथ ये प्यार इतना बढ़ जायेगा मुझे पता नही था।

अब मैं उससे तो कभी नही मिल पाउँगा और ना ही मिलने की कभी कोशिश करूँगा क्योंकि- उसके साथ अब ज़िन्दगी बिता भी लूँ तो ये दर्द,ये यादे और ये आँसू जो उसकी याद में बहाए है सब बेकार हो जाएगा और इस किताब का कोई महत्व नही बचेगा। मैं फिर किसी से ये नही कह पाउँगा कि कोई मेरे दिल में है जिससे मैं बेहद प्यार करता था और वो मुझे नही मिली। बेहतर यही होगा कि-वो मुझसे बार-बार नफरत करे और मैं बार उससे प्यार जताऊं ताकि वो बार-बार मुझे याद आये।
मेरी मंज़िल का जो सफर है वो बस ख़ामोशी के साथ कटना चाहिए।

प्यार और घृणा तो इंसान का स्वभाव है वो कब किसे प्यार करे कब दफा कर दे इसका कोई भरोसा नही।
ओशो ने प्रेम को सिर्फ एहसास बताया है ना की हासिल करना।
जो हमे हासिल है उसके लिए क्या सोचना। तुम तो मेरे खयालो में हो एक बारिश की बूँद बनकर मेरी आँखों में हो। तुम्हारे ही खयालो के नूर से मेरी राते रोशन हुई है।

मैं तो हमेशा इस फ़िक्र में रहता हूँ कि-मैं तुम्हे अपनी शायरी में किस ख़ूबसूरत चीज़ से नवाज़ दूँ। तुम्हे किस कल्पना में अच्छे से ढाल दूँ। किस चीज़ से तुम्हारी उपमा दूँ।
तुम्हारी ये यादें मुझे अकेला नही छोड़ती रोज़ तुम्हारे रूप के नये-नये किस्से सुनाकर मुझे बहला देती है। लोग मुझसे सबकुछ छीन सकते है लेकिन इन यादो को मुझसे कोई जुदा नही कर सकता। मेरे कब्र जाने के बाद भी तुम्हारी कहानी अमर रहेगी। लोग तुम्हे हमेशा याद करते रहेंगे।

मैं भी सबकी तरह धीरे-धीरे खुद-ब-खुद बदल जाऊंगा। आज मुझे दर्द हो रहा है तो लिख रहा हूँ कल कोई और मेरी ज़िन्दगी में आ जाए तो शायद ये जख्म भर जाए। उसकी कमी किसी ना किसी तरह तो पूरी हो ही जायेगी लेकिन इस दिल की कमी को सिर्फ वही पूरा कर सकती है जिसके लिए ये कलम भी दिन रात रोती रहती है। आज भी वो मुझे प्यार भरी नज़रो से देखे तो शायद मुझे उसकी कमी महसूस ही नही होगी।

 


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