Kavita In Hindi On Life | जिंदगी पर कविताएँ

Kavita In Hindi On Life | जिंदगी पर कविताएँ

 

कल एक झलक ज़िंदगी को देखा,
वो राहों पे मेरी गुनगुना रही थी,

फिर ढूँढा उसे इधर उधर
वो आँख मिचौली कर मुस्कुरा रही थी,

एक अरसे के बाद आया मुझे क़रार,
वो सहला के मुझे सुला रही थी

हम दोनों क्यूँ ख़फ़ा हैं एक दूसरे से
मैं उसे और वो मुझे समझा रही थी,

मैंने पूछ लिया- क्यों इतना दर्द दिया
कमबख्त तूने,
वो हँसी और बोली- मैं जिंदगी हूँ पगले
तुझे जीना सिखा रही थी।

 


Kal Ek Jhalak Zindagi Ko Dekha

 

Kal Ek Jhalak Zindagi Ko Dekha

Wo Raahon Pe Meri Gunguna Rahi Thi

Phir Dhundha Use Idhar-Udhar

Wo Aankh Michauli Kar Muskura Rahi Thi

Ek Arse Ke Baad Aaya Mujhe Karaar

Wo Sahala Ke Mujhe Sula Rahi Thi

Hum Dono Kyu Khafa Hai Ek Doosre Se

Mai Use Aur Wo Mujhe Samjha Rahi Thi

Maine Pooch Liya Kyu Itna Dard Diya

Kambakhat Tune

Wo Hasi Aur Boli Mai Zindagi Hu Pagle

Tujhe Jeena Sikha Rahi Thi

 


Poems On Life In English

 

तू जिंदगी को जी
उसे समझने की कोशिश न कर

सुंदर सपनो के ताने बाने बुन
उसमे उलझन की कोशिश न कर

चलते वक्त के साथ तु भी चल
उसमें सिमटने की कोशिश न कर

अपने हाथो को फैला, खुलू कर साँस ले
अंदर ही अंदर घुटने की कोशिश न कर

मन में चल रहे युद्ध को विराम दे
खामख्वाह खुद से लड़ने की कोशिश न कर

कुछ बाते भगवान् पर छोड़ दे
सब कुछ खुंद सुलझाने की कोशिश न कर

जो मिल गया उसी में खुश रह
जो सूकून छीन ले वो पाने कोशिश न कर

रास्ते की सुंदरता का लुफ्त उठा
मंजिल पर जल्दी पहुचने की कोशिश न कर।

 


 

Samajhane Ki Koshish N Kar

Tu Zindagi Ko Ji

Use Samajhane Ki Koshish N Kar

Sundar Sapno Ke Taane-Baane Bun

Usme Ulajhane Ki Koshish N Kar

Chalte Wakt Ke Sath Tu Bhi Chal

Usme Simatne Ki Koshish N Kar

Apne Hath Ko Faila Khul Kar Sans Le

Andar Hi Andar Ghutne Ki Koshish N Kar

Man Me Chal Rahe Yuddh Ko Viraam De

Khwaamkha Khud Se Ladne Ki Koshish N Kar

Kuch Baatein Bhagwan Par Chhor De

Sab Kuch Khud Suljhaane Ki Koshish N Kar

Jo Mil Gaya Usi Me Khush Reh

Jo Sukoon Cheen Le Use Paane Ki Koshish N Kar

Raaston Ki Sundarata Ka Lutf Utha

Manzil Par Jaldi Pahuchane Ki Koshish N Kar

 


Hindi Me Kavita On Life

बचपन बीत गया लड़कपन में,
जवानी बीत रही घर बनाने में,
जंगल सी हो गई है जिंदगी,
हर कोई दौड़ रहा आंधी के गुबार में।

हर रोज नई भोर होती,
पर नहीं बदलता जिंदगी का ताना बाना,
सब कर रहे हैं अपनी मनमानी,
लेकिन जी नहीं रहे अपनी जिंदगानी।

कोई पास बुलाए तो डर लगता है,
कैसी हो गई है यह दुनिया बेईमानी,
सफर चल रहा है जिंदा हूं कि पता नहीं,
रोज लड़ रहा हूं चंद सांसे जीने के लिए।

मिल नहीं रहा है कोई ठिकाना,
जहां दो पल सिर टिकाऊ,
ऐसे सो जाऊं की सपनों में खो जाऊं,
बचपन की गलियों में खो जाऊं।

वो बेर मीठे तोड़ लाऊं,
सूख गया जो तालाब उसमें फिर से तैर आऊं,
मां की लोरी फिर से सुन आऊं,
भूल जाऊं जिंदगी का ये ताना बाना।

देर सवेर फिर से भोर हो गई,
रातों की नींद फिर से उड़ गई,
देखा था जो सपना वो छम से चूर हो गया,
जिंदगी का सफर फिर से शुरू हो गया।

आंखों का पानी सूख गया,
चेहरे का नूर कहीं उड़ सा गया,
अब जिंदगी से एक ही तमन्ना,
सो जाऊं फिर से उन सपनों की दुनिया में।

 


Bachpan Beet Gaya Ladakapan Me

 

Bachpan Beet Gaya Ladakapan Me

Jawani Beet Rahi Ghar Banane Me

Jungle Si Ho Gayi Hai Zindagi

Har Koi Daud Raha Aandhi Ke Gubaar Me

Har Roz Nayi Bhor Hoti

Par Nahi Badalata Zindagi Ka Taana-Baana

Sab Kar Rahe Hai Apni Manmaani

Lekin Ji Nahi Rahe Apni Zindgani

Koi Paas Bulaye Darr Lagta Hai

Kaisi Ho Gayi Hai Yeh Duniya Be-Imaani

Safar Chal Raha Hai, Zinda Hu Ki Pata Nahi

Roz Lad Raha Hu Chand Sanse Jeene Ke Liye

Mil Nahi Raha Hai Koi Thikaana

Jahan Do Pal Sir Tikaun

Aisa So Jaun Ki Sapno Me Kho Jaun

Bachpan Ki Galiyon Me Kho Jaun

Wo Ber Meethe Tod Laun

Sookh Gaya Jo Talaab Usme Phir Se Tair Aaun

Maa Ki Lori Phir Se Sun Aaun

Bhool Jaun Zindagi Ka Ye Taana-Baana

Der Savere Phir Se Bhor Ho Gayi

Raaton Ki Nind Phir Se Ud Gayi

Dekha Tha Jo Sapna Wo Chan Se Choor Ho Gaya

Zindagi Ka Safar Phir Se Choor Ho Gaya

Aankho Ka Paani Sookh Gaya

Chehre Ka Noor Kahin Ud Sa Gaya

Ab Zindagi Se Ek Hi Tamanna

So Jaun Phir Se Un Sapno Ki Duniya Me

 


Poem on Life in Hindi

 

कहीं धूप तो, कहीं छाव है,
कहीं दुख तो, कहीं सुख है,
हर घर की यही कहानी है,
यह रीत पुरानी है।

आज रात दुख वाली है तो कल दिवाली है,
दुख-दर्द और खुशियों से भरी यही जिंदगानी है,
तेरी मेरी यह कहानी निराली है,
यह कहानी पुरानी है, लेकिन हर पन्ना नया है।

आज नया है तो कल पुराना है,
फिर किसी और को आना है,
फिर किसी को जाना है,
यही मतवाली जिंदगी का तराना है।

 

 Hindi Poetry on Life

Kahin Dhoop Toh Kahin Chaaw Hai

Kahin Dukh Toh Kahin Sukh Hai

Har Ghar Ki Yahi Kahani Hai

Yahi Reet Puraani Hai

Aaj Raat Dukh Waali Hai Toh Kal Diwali Hai

Dukh-Dard Aur Khusiyon Se Bhari Yahi Zindagani Hai

Teri Meri Yeh Kahani Niraali Hai

Yeh Kahani Puraani Hai, Lekin Har Panna Naya Hai

Aaj Naya Hai Toh Kal Puraana Hai

Phir Kisi Aur Ko Aana Hai

Phir Kisi Ko Jaana Hai

Yahi Matwaali Zindagi Ka Tarana Hai

 


Poems About Life In Hindi

यूँ तेरा मेरा साथ हो
बनारस का गंगा घाट हो
शाम के हसीन नज़ारे हो
चाँद भी साथ हमारे हो
प्रकृति की हवा सुहानी हो
पक्षियों की मधुर वाणी हो
तेरी मेरी अनकही कहानी हो
हाथों में निर्मल गंगा पानी हो
कुछ वादें तेरी जुबानी हो
कुछ कसमे मेरी जुबानी हो
घाटों पर रात का सन्नाटा हो
गंगा के लहरो की गूंज हो
वहाँ हम एक ज्योतिपुन्ज हो
ऐसी ही प्रेममयी हमारी कहानी हो
गंगा स्वयं साक्ष्य जिसकी निशानी हो


Yun Tera Mera Sath Ho

Banaras Ka Ganga Ghaat Ho

Shaam Ke Haseen Nazare Ho

Chand Bhi Sath Hamare Ho

Pankshiyon Ki Madhur Vaani Ho

Hathon Me Nirmal Ganga Paani Ho

Kuch Waadein Teri Jubaani Ho

Ghaaton Par Raat Ka Sannata Ho

Ganga Ke Lehron Ki Goonj Ho

Wahan Hum Ek JyotiPoonj Ho

Aisi Hi Prem-Mayi Hamari Kahani Ho

Ganga Svyam Sakshya Jiski Nisaani Ho

 


Zindagi Poem in Hindi

दुनिया की तमाम भाषाओं
दुनिया की तमाम बोलियों से इतर
हर भाषा और बोली में
प्रेम की
अपनी खुद की
एक अलग भाषा और बोली हुआ करती है

 


Duniya Ki Tamaam Bhashaao

Duniya Ke Tamaam Boliyon Se Itar

Har Bhasha Aur Boli Me

Prem Ki

Apni Khud Ki

Ek Alag Bhasha Aur Boli Hua Karti Hai


Kavita In Hindi On Life | जिंदगी पर कविताएँ

प्रेम के शब्दों के परंपरागत अर्थ
खोजे जाय अगर शब्दकोश में
तो मायने सुलझने की जगह
और उलझ सकते हैं
क्यों कि
इसका अपना
बिल्कुल अपना शब्दकोश है
निराले अंदाज वाला
अनदेखा
अनलिखा

 


 

Prem Ki Shabdon Ke Paramparagat Arth

Khoje Jaayein Agar Shabdkosh Me

Toh Mayane Sulajhane Ki Jagah

Aur Ulajh Sakte Hai

Kyoki Iska Apna

Bilkul Apna Shabdkosh Hai

Nirale Andaaz Wala Anokha

Andekha

Anlikha

 


Kavita In Hindi On Life | जिंदगी पर कविताएँ

मसलन
जब मेरी वह कहती है
नहीं चाहती मैं तुम्हें
तो दरअसल यह उसका
हमको और अधिक चाहना होता है
और जब मेरी वह कहती है
तुम्हें कुछ भी नहीं मालूम
कि तुम्हारे प्यार के लिए
मैं मर रही हूँ कितना
तो वास्तव में
यह उसका जीना होता है
भरपूर उछाह के साथ जीना
अपनी प्यार वाली दुनिया में

 


 

Maslan

Jab Meri Wah Kehati Hai

Nahi Chahati Mai Tumhe

Toh Darasal Yeh Uska

Hamko Aur Adhik Chahana Hota Hai

Aur Jab Meri Wah Kehti Hai

Tumhe Kuch Bhi Nahi Maloom

Ki Tumhare Pyaar Ke Liye

Mai Mar Rahi Hu Kitna

Toh Vaastav Me

Yeh Uska Jeena Hota Hai

Bharpoor Uchaal Ke Sath Jeena

Apni Pyaar Wali Duniya Me

 


Kavita In Hindi On Life | जिंदगी पर कविताएँ

जब वह हमसे झगड़ती है बात बात पर
यह उसका और अधिक प्यार जताने का तरीका होता है
इसे और अधिक साफ करते हुए कहती है वह
जिससे प्यार करता है आदमी
उसी से तो झगड़ सकता है ना वह
राह चलते लोगों से कौन झगड़ता है भला

उसका यह कहना कितना ठीक है कितना बेठीक
इसके पचड़े में न पड़ कर मैं खुद
उसके खुले बालों में अपनी उँगलियाँ लहराते हुए
होठों को सीटी की शक्ल में ले जाकर
कोई रोमांटिक गीत गाते हुए
जब कहता हूँ मैं
कुछ भी अच्छा नहीं लगता अब मुझे
तो इसका मतलब यह होता है
कि प्यार में सब कुछ
यहाँ तक कि दुनिया की एक एक चीज
बेहद खूबसूरत लगने लगी है हमें
प्यार के इन बेहतरीन पलों में

प्यार की खुरदरी सी राह पर चलते हुए
किसी नौसिखिया की तरह

डगमगाते रहते हैं हमारे कदम
और तमाम बाधाओं से डरते भी रहते हैं हम
जबकि हकीकत में होता यह है
कि अपने भरपूर हौंसले से
प्यार करते हुए एक दूसरे को
चल रहे होते हैं हम
बढ रहे होते हैं हम
प्रतिपल
आगे… …और आगे
पूरी निडरता के साथ


Kavita In Hindi On Life | जिंदगी पर कविताएँ

जीवन के कण कण में
रहता हुआ
बहता हुआ
सतत जीवन की
अनवरत कहानी कहता हुआ प्यार
कहाँ कभी रीता
कहाँ कभी बीता
यह तो
जीवन के लिए
और जीवन की ही एक जरूरी कविता

 


 

Jeevan Ke Kan-Kan Me

Rehta Hua

Behta Hua

Satat Jeevan Ki

Anvarat Kahani Kehta Hua Pyaar

Kahan Kabhi Reeta Kahan Kahi Beeta

Yeh Toh Jeevan Ke Liye Aur Jeevan Ki Hi Ek Zaroori Kavita

 


 

अगर अनुवाद करना हो किसी को
हमारी सीधी सादी इन पंक्तियों का
तो कविता के गुणी के तरह का ही
हुनरमंद होना पड़ेगा उसे
जिसमें शब्दों को नहीं उतारा जाता
उनके परंपरागत शब्दकोशीय अर्थों वाले
कार्बनीय लहजे में
बल्कि जहाँ देनी पड़ती है
अक्षर दर अक्षर
शब्द दर शब्द
पंक्ति दर पंक्ति के बीच की
खाली जगहों के
भावों को भी तरजीह

 


 

Agar Anuwaad Karna Ho Kisis Ko

Hamari Seedhi Sadhi In Panktiyon Ka

Toh Kavita Ke Gudi Ke Tarah Hi

Hunar Mand Hona Padega Use

Jisme Shabdon Ko Nahi Utaara Jata

Unke Paramparagat Shabdkoshiya Artho Waale

Kaarbaniy Lehjon Me

Balki Jahan Deni Padti Hai

Akshar Dar Akshar

Shabd Dar Shabd

Pankti Dar Pankti Ke Beech

Khaali Jagahon Ke

Bhaavon Ko Bhi Tarjeeh

 


जीवन खोजता आधार!

हाय, भीतर खोखला है,
बस मुलम्मे की कला है,
इसी कुंदन के ड़ले का नाम जग में प्यार!
जीवन खोजता आधार!

बूँद आँसू की गलाती,
आह छोटी-सी उड़ाती,
नींद-वंचित नेत्र को क्या स्वप्न का संसार!
जीवन खोजता आधार!

विश्व में वह एक ही है,
अन्य समता में नहीं हैं,
मूल्य से मिलता नहीं, वह मृत्यु का उपहार!
जीवन खोजता आधार!

 


 

Haay Bhitar Khokhala Hai

Bas Mulamme Ki Kala Hai

Isi Kundan Ke Dale Ka Naam Jag Me Pyar

Jeevan Khojata Aadhar

Boond Aansu Ki Galati

Aah Choti Si Udaati

Nind Vanchit Netra Ko Kya Swapn Ka Sansaar

Jeevan Khojata Aadhar

Vishwa Me Wah Ek Hi Hai

Anya Samta Me Nahi Hai

Mulya Se Milta Nahi Wah Mrityu Ka Uphaar

Jeevan Khojta Aadhar

 


है हार नहीं यह जीवन में! – Harivansh Roi Bachchan

जिस जगह प्रबल हो तुम इतने,
हारे सब हैं मानव जितने,
उस जगह पराजित होने में है ग्लानि नहीं मेरे मन में!
है हार नहीं यह जीवन में!

मदिरा-मज्जित कर मन-काया,
जो चाहा तुमने कहलाया,
क्या जीता यदि जीता मुझको मेरी दुर्बलता के क्षण में!
है हार नहीं यह जीवन में!

सुख जहाँ विजित होने में है,
अपना सब कुछ खोने में है,
मैं हारा भी जीता ही हूँ जग के ऐसे समरांगण में!
है हार नहीं यह जीवन में!

 


 

Jis Jagah Prabal Ho Tum Itne

Haare Sab Hai Manav Jitne

Us Jagah Parajit Hone Me Hai Glaani Nahi Mere Man Me

Hai Haar Nahi Yeh Jeevan Me

Madira-Majjid Kar Man Kaaya

Jo Chaha Tumne Kehlaaya

Kya Jeeta Yahi Jeeta Mujhko Meri Durbalata Ke Chaan Me

Har Haar Nahi Yeh Jeevan Me

Sukh Jahan Vijit Hone Me Hai

Apna Sab Kuch Khone Me Hai

Mai Haara Bhi Jeeta Hi Hu Jag Ke Aise Samrangan Me

Hai Haar Nahi Yeh Jeevan Me

 


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