Ek Tasavvur – Nihal Srivastava

Ek Tasavvur – Nihal Srivastava

एक तसव्वुर

 

मैंने उस दिन बहुत सोच-समझकर फैसला लिया कि-अब मैं सीधे सिमरन को ही मनाऊँगा और उससे अपने दिल की बात कहूंगा कि-तुम कितनी खूबसूरत हो और तुम्हारी खूबसूरती से मुझे कितना प्यार है और उससे कह दूंगा-
तुम मेरी ज़िंदगी हो हर बंदगी हो मेरी हर एक साँस पर तुम्हारा ही नाम आता है। मेरे दिल की धड़कन जैसे तुम्हारी कदमो के आहट है। मेरी बेजुबान लफ़्ज़ों की आवाज़ तुम हो। मेरे धुंधले चेहरे की चमक तुम हो। मैं जब आंख़े बंद करता हूँ तो तुम्हारे ही ख्वाब आते है और जब आंखें खोलता हूँ तो बस तुम्हे ही ढूढने लगता हूं।
जब ये हवा चलती है तो उन हवाओ में तुम्हारे ज़ुल्फो की खुशबू को आसानी से पहचान लेता हूँ और जब मौसम बदलता है तो मैं समझ जाता हूं कि तुमने जरूर अपने हाथो में मेहंदी लगाई होगी क्यूंकि-तुमको मेहंदी बहुत पसंद है। कभी-कभी जब बेवक्त बारिश होती है तो मैं मुस्कुराने लगता हूँ क्योंकि मै समझ जाता हूँ कि- ऐसी बरसात सिर्फ तुम्हारे हँसने पर ही हो सकती है। बारिश की हर बूँद से मुझे तुम्हारी हर एक हरकत की खबर मिल जाती है।
मैं तुम्हारी याद में रोज़ एक नई ग़ज़ल लिखकर अपने दर्द को इस दिल से रिहा करता हूँ। अगर तुम ना होती तो मैं किसे सोचकर अपनी कहानी लिखता। मैं तो हर रोज़ तुम्हारे नाम का एक फूल तोड़कर अपने कहानी के पन्नो पर सजाता हूं और ये महसूस करता हूं कि- ये फूल मैंने तुम्हारे जुल्फों में लगाया है। ये फूल वक्त के साथ भले ही मुरझा गये है मगर मै इन्हें किताबो में समेटकर ज़िन्दगी भर के लिए रखना चाहता हूं। ये आज भी अपने रंग को नही खो सके। हर दिन तुम्हारे सुन्दरता की एक नई कहानी लिखकर इन गुलाबो की खुशबू को तुम तक पहुँचाना चाहता हूँ।
मै तुम्हे कौन सी ख़ुशी दूँ। किस जन्नत में तुम्हे ले जाऊँ। किस जन्नत की तुम्हे रानी बना दूँ। तुम्हे किस नाम से बुलाऊँ।
ये सारी रिवायतें तो पुरानी हो चुकी है। तुम्हे चाँद-तारे तो क्या, दिल तो करता है पूरा आसमान ही सौप दूँ।
मै तुमसे इतना प्यार करता हूँ कि-ये लफ़्ज़ों में बयां नही हो सकता। फिर भी मेरी एक छोटी सी कोशिश है कि- मैं तुम्हे इन पन्नो में सजा दूँ और ज़िन्दगी भर मैं इसे अपने सिरहाने से लगाए रखूं जैसे मैंने तुम्हे हमेशा के लिए अपने नाम कर लिया है।

 


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