Ek Khwab Haqiqat Ka – Nihal Srivastava

Ek Khwab Haqiqat Ka – Nihal Srivastava

ख़्वाब हक़ीक़त का

 

मैं अभी 21 साल का हूं और अभी से सबकुछ जैसे भूलने लगा हूं। मुझे कुछ भी याद नही रहता, ऑफिस में भी चुपचाप रहता हूँ। किसी से कोई बात नही करता। मुझे हमेशा डर लगता है कि- मेरा जो सपना है वो पूरा होगा या नही। मैं तो प्यार में हार गया कही अपने काम में भी ना हार जाऊँ। मैं नकारा इंसान हूं जहाँ जाता हूँ असफलता ही हाथ लगती है

 

मेरे जीवन में पैसे की कमी बहुत रही पर पाने की कभी चाहत नही हुई। मैं अपने जीवन में बहुत कुछ करना चाहता हूं ताकि पूरी दुनिया में मेरा नाम् हो। मैं तो बस नाम का भूखा हूं। हमेशा के लिए अमर होना चाहता हूं। लोगो के लिए मिसाल बनना चाहता हूं। जो लोग मुझे कमजोर समझते है। मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि- मैं भी किसी से कम नही।

 

“जब हौसलों के दिए बुझने लगते है तो ख़ामोशियो की चिंगारी लफ्ज़ बनकर उन हौसलों को आग में बदल देती है”

 

खुद को समझाने के लिए मैं रोज़ अपने विचारों से जूझता रहता हूँ  उन्हें स्थिर करके के लिए अनेक उपाय करता हूँ। खुद से सवाल करता हूं और खुद ही जवाब देता हूँ।  मैं हमेशा इस खोज में लगा रहता हूँ कि- मैं खुद से संतुष्ट क्यों नही हूं? शायद मैं जो पाना चाहता हूँ, मुझे जो अच्छा लगता है वो मुझे हासिल नही होता या फिर मैंने सही रास्तो का चुनाव नही किया।
एक बात जो दिल की गहराई से ज़ुबाँ तक उठने की कोशिश करती है मगर संतुष्टि नही मिलती, प्यास और बढ़ती जाती है।

 

“इस प्यार की जंग में हार जाने से ज़िन्दगी के हर रंग से नफरत हो गयी है।”

 

पता नही मुझे क्यों हमेशा विश्वास रहता था कि-मैं सिमरन से कभी ना कभी तो मिलूंगा ही और वो भी मुझसे कही ना कही मिलेगी और हम दोनों अच्छे से इस दुनिया में अपना-अपना किरदार निभाएंगे। हम दोनो में इतना प्यार रहेगा कि सारी दुनिया हमारा प्यार देखकर जलेगी।
मैं हमेशा सोचता रहता था कि-सबसे पहले सिमरन ने मुझे प्रपोज़ किया है। जितना मैं उसे चाहता हूं वो भी मुझे उतना ही चाहती है। हमलोग जी भर के बातें करते है और कुछ कसमे-वादों से एक-दूसरे को बांध देते है। मैंने उसे गले लगाकर ज़िंदगी की सारी ख़ुशी पा ली है। एक नई ज़िन्दगी की शुरुवात होने जा रही है।
ऐसे ही कई सारे ख्याल मुझे आते रहते थे। एक दिन ये सच हुआ लेकिन मेरे सपनो में। बहुत ही खूबसूरत दृश्य था। काश,ये सपना सच हो जाए।
उस रात मैंने पहली बार सिमरन को ख्वाबो में देखा था-

 

सिमरन-नील,मैं आपसे कुछ मांगना चाहती हूँ। क्या आप मुझे दे सकते है।

 

नील-तुम कहो तो सारी दुनिया तुम्हारे कदमो में रख दूँ

 

सिमरन-ये चाँद देख रहा है चांदनी सुन रही है अपनी बात से मुकर नही सकते।

 

नील-तुम कह कर देखो तुम्हारी हर ख्वाहिश पूरा करने के लिए तैयार हूँ।

 

सिमरन-मुझे आपका दिल चाहये,दिल में थोड़ी से ज़गह

 

नील-ये तुम क्या कह रही हो।

 

सिमरन-हां,मुझे आपसे इश्क़ हो गया है। मैं अपने जीवन और प्रेम को आपके कदमो में समर्पित करती हूँ। आपको इसे स्वीकार करना होगा।

 

नील-माफ़ करो,मैं एक साधारण इंसान हूं और तुम्हे मुझसे प्यार करना शोभा नही देता।

 

सिमरन-प्रेम पद नही पवित्रता जानता है आपको अपने प्रेम को छुपाना नही चाहिए। आप अपने होठो से कह दो जो आपके दिल में है।

 

नील-ये कभी नही हो सकता। तुम्हारे माँ-बाप का सिर शर्म से झुक जायेगा।

 

सिमरन-क्या आपके दिल में हमारे लिए कोई प्रेम नही,क्या आपको किसी से मोहब्बत नही होती।

 

मैं चुपचाप बिना कुछ बोले ही वापस लौटने की कोशिश करने लगा मगर सिमरन मेरे हाथ को खींचकर झट से गले लग जाती है। मैंने देखा उसकी आँखों से आँसू भी छलक रहा था।

 

सिमरन-मैं आपके बिन कहाँ जाऊँ,जब आप मेरी ज़िंदगी में नही आ सकते तो मेरी नज़रो के सामने क्यों आये थे। क्यों मुझे प्यार में पागल बनाए। लग रहा था मुझे कभी इश्क़ ही नही होगा मगर आज देखो हो ही गया। अब मैं आपको छोड़कर आपके बिन कैसे जिऊँ

 

नील-हमारा दिल इतना बंजर नही कि प्रेम पैदा ही न हो। इन चाँद-तारो और खुले आसमानों को साक्षी मानकर मैं तुम्हे अपनी प्रेमिका के रूप में स्वीकार करता हूं। तुम्हारा स्थान सदैव मेरे दिल में होगा। इसका हश्र क्या होगा मैं नही जानता मगर अब से तुम मेरी ज़िंदगी हो,हर साँस हो,हर बंदगी हो।

 


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